LATEST NEWS
*प्रकाशनार्थ* : *कम्युनिस्ट-इस्लामिक साज़िशों का हौवा*
*(आलेख : एम.ए. बेबी)*
*प्रेस विज्ञप्ति* लैलूंगा के लारीपानी कन्या छात्रावास में लापरवाही का आरोप! पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग *ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए पात्र किशोरियों का हो रहा निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण* ग्राम बंगुरसिया मेन रोड किनारे अज्ञात व्यक्ति का शव साइन बोर्ड पर लटका मिला, जांच में जुटी चक्रधरनगर... *प्रकाशनार्थ* : *बतौर मछुआरा भी हो महिलाओं की पहचान* उद्योगों से जुड़े लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें : कलेक्टर* जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाएं, लंबित योजनाएं समय-सीमा में करें पूर्ण : कलेक्टर श्री मयंक चतु... प्रेस विज्ञप्ति*
October 16, 2026

अंगेकेला गाँव में बाजे गाजे के साथ भोजली विसर्जन सम्पन्न गांव में मचा खुशी का लहर*

Spread the love

*अंगेकेला गाँव में बाजे गाजे के साथ भोजली विसर्जन सम्पन्न गांव में मचा खुशी का लहर*

आज हम आपको छत्तीसगढ़ की एक खास परंपरा से रूबरू करा रहे हैं – लोक पर्व भोजली का उत्सव! यह त्योहार न केवल हरियाली और कृषि का प्रतीक है, बल्कि दोस्ती और भाईचारे को भी मजबूत करता है।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भोजली पर्व का आयोजन धूमधाम से मनाया जाता है।वही आज लैलूंगा के अंगेकेला गांव में कुंवारी लड़कियां और महिलाएं गेहूं या जौ के बीज से भोजली तैयार करती हैं। इन बीजों को टोकरियों में बोया जाता है और पवित्र स्थान पर अंधेरे में रखकर इनकी सेवा की जाती है।
इन अंकुरित पौधों की पूजा भोजली देवी के रूप में की जाती है और महिलाएं भोजली सेवा गीत गाकर अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और अच्छे सेहत की कामना करती हैं। यह त्योहार धान, गेहूं और जौ जैसी फसलों की अच्छी पैदावार का प्रतीक है।
नवखाई के दिन, यानी आज, इन भोजली को नदी और तालाबों में विसर्जित किया जाता है। लोग सिर पर भोजली की टोकरी रखकर पारंपरिक मंगलगीत गाते हुए झाँझ मंदार के थाप पर घाटों पर पहुंचते हैं। यह दृश्य मनमोहक होता है।

भोजली उत्सव में ‘मितान’ या ‘महाप्रसाद’ बनाने की अनोखी परंपरा भी है। इसमें महिलाएं या लड़कियां भोजली की बाली को एक-दूसरे के कान में लगाकर दोस्ती का रिश्ता बनाती हैं, जिसे ‘भोजली बदना’ कहते हैं। इस दोस्ती में वे एक-दूसरे का नाम नहीं लेते, बल्कि हमेशा ‘महाप्रसाद’ या ‘भोजली’ कहकर ही संबोधित करते हैं। यह रिश्ता जीवन भर चलता है।
यह पर्व महिलाओं की शक्ति, श्रद्धा और किसानों की मेहनत का प्रतीक है। यह संस्कृति, कृषि और सामाजिक एकता का संदेश देता है।
*भोजली सेविका*
रीना डेल्की,गीतांजलि सिदार,सपना पहाड़ी,कांति सिदार,ज्योति सिदार,रितु साहू, मोनिका सिदार,रामशिला यादव,अन्यसामिल थे!

अंगेकेला में भव्य भोजली उत्सव का भी आयोजन किया गया जिसमे राजू ठाकुर ( विद्युत् मंडल बगीचा) तेज साहू ( पत्रकार ) नारायण सिदार ( सहायक सचिव ग्राम पंचायत रेगडी)  मनोहर प्रधान ( भूतपूर्व BDC झगरपुर ) ओमप्रकाश निषाद  चंद्रप्रकाश ( डेको कोल माइनस तमनार) सुरेश साहू ( साहू ढाबा गोसाईडीह) दुष्यंत पैकरा ( पैकरा टूर एंड ट्रेवल्स रेगडी) सोनू साहू, श्याम सुंदर सिदार,ओमसिंग, राजनाथ सिंह ( पटेल),एवं गांव के कई मान्य लोग शामिल थे

Website | + posts

Editor In Chief - k24news.co.in
Mo.7509127461

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.