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October 15, 2026

लैलूंगा में धधक रहा “लाल ईंट कांड” – जंगल कटे, भट्टे सजे, प्रशासन चुप!

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लैलूंगा में धधक रहा “लाल ईंट कांड” – जंगल कटे, भट्टे सजे, प्रशासन चुप!

लैलूंगा क्षेत्र में इन दिनों लाल ईंट का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। गांव-गांव और खेत-खलिहानों के किनारे ईंट भट्टों की कतारें लग चुकी हैं। दिन-रात धुआं उगलते ये भट्टे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि जंगलों की हरियाली पर भी खुला प्रहार कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध खेल चल रहा है?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ईंट जलाने के लिए बड़े पैमाने पर जंगल की लकड़ियां काटी जा रही हैं। हरे-भरे पेड़ रातों-रात धराशायी हो रहे हैं और ट्रैक्टरों में भरकर भट्टों तक पहुंचाए जा रहे हैं। वन संपदा की इस खुली लूट पर वन विभाग की चुप्पी लोगों के गले नहीं उतर रही। क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं? या फिर सब कुछ जानकर भी आंखें मूंद ली गई हैं?

केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्थानों पर बिना वैध अनुमति और नियमों के विरुद्ध ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। भूमि उपयोग परिवर्तन, पर्यावरण अनुमति और खनन नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं — यह जांच का विषय है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

लैलूंगा के ग्रामीणों का कहना है कि भट्टों से निकलने वाला काला धुआं खेतों और बस्तियों तक पहुंच रहा है, जिससे फसल और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को सांस संबंधी परेशानियां होने लगी हैं। पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, पर कार्रवाई शून्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह जंगलों की अंधाधुंध कटाई जारी रही, तो आने वाले समय में भू-क्षरण, जल संकट और वन्यजीवों का पलायन जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल — जिम्मेदार कौन?
क्या अवैध भट्टों पर कार्रवाई होगी?
क्या जंगल काटने वालों पर केस दर्ज होगा?
या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा?

लैलूंगा की जनता अब जवाब चाहती है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल जांच दल गठित कर अवैध ईंट भट्टों की सूची तैयार करे, लकड़ी की आपूर्ति की जांच करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे। अन्यथा यह “लाल ईंट कांड” आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

लैलूंगा की धरती जल रही है, जंगल कट रहे हैं — और जिम्मेदार खामोश हैं!

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