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October 16, 2026

*बिलासपुर प्रेस क्लब कार्यकारणी सदस्य कैलाश यादव पर हुई एफ आई आर, पूर्व अध्यक्ष ने आई टी एक्ट लगाने की मांग*

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*बिलासपुर प्रेस क्लब कार्यकारणी सदस्य कैलाश यादव पर हुई एफ आई आर, पूर्व अध्यक्ष ने आई टी एक्ट लगाने की मांग*

*सिविल लाईन पुलिस का अजब खेल: डिजिटल सबूत पर खानापूर्ति, जुबानी शिकायत पर आनन-फानन में पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष पर FIR*

(गोविन्द शर्मा पत्रकार✍️ )


बिलासपुर। आम नागरिक जहां थानों के चक्कर काट-काट कर चप्पलें घिस देता है, वहीं सिविल लाईन पुलिस का दोहरा रवैया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के बीच उपजे विवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने ठोस डिजिटल साक्ष्यों वाली शिकायत पर आईटी एक्ट की धाराएं न लगाकर मामूली धाराओं में मामला निपटा दिया, वहीं दूसरी ओर दबाव में आकर बिना प्राथमिक जांच के आनन-फानन में काउंटर एफआईआर दर्ज कर दी।
*व्हाट्सएप ग्रुप में अभद्र टिप्पणी और आईटी एक्ट की अनदेखी*

विवाद की शुरुआत बिलासपुर प्रेस क्लब के अधिकृत व्हाट्सएप ग्रुप से हुई। आरोप के अनुसार, कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव ने ग्रुप में पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अशोभनीय भाषा, अमर्यादित टिप्पणियां और धमकियां दीं। डिजिटल साक्ष्यों और चैट स्क्रीनशॉट के साथ जब पूर्व अध्यक्ष ने सिविल लाईन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, तब नियमानुसार सोशल मीडिया/डिजिटल माध्यम पर बदजुबानी के तहत आईटी एक्ट की धाराएं लगनी चाहिए थीं। लेकिन सिविल लाईन पुलिस ने कथित तौर पर नरमी बरतते हुए मामूली धाराओं में ही अपराध दर्ज किया।

*जुबानी आरोप पर बिना जांच तत्काल काउंटर एफआईआर*

मामले में पुलिस की निष्पक्षता तब पूरी तरह संदिग्ध हो गई जब कैलाश यादव ने 15 अगस्त के दिन कथित धमकी मिलने की जवाबी शिकायत थाने में दी। इस शिकायत के समर्थन में सिर्फ अपनी ही कार्यकारिणी के चुनिंदा पदाधिकारियों की गवाही का हवाला दिया गया था। जहां सैकड़ों शिकायतों पर पुलिस हफ्तों जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेती है, वहीं इस मामले में बिना किसी निष्पक्ष जांच या ठोस तकनीकी साक्ष्य के सीधे पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।

*कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल*

दबाव की राजनीति: आखिर सिविल लाईन पुलिस पर किसका दबाव था कि बिना किसी स्वतंत्र जांच के तुरंत काउंटर केस दर्ज कर दिया गया?
साक्ष्यों की अनदेखी: चैट के स्पष्ट स्क्रीनशॉट मौजूद होने के बावजूद साइबर/आईटी एक्ट की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं?

*जांच का दोहरा मापदंड*:

आम जनता की शिकायतों पर ‘जांच जारी है’ का हवाला देने वाली पुलिस ने इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?
सिविल लाईन पुलिस की इस हड़बड़ाहट और दोहरे रवैये से न्याय व्यवस्था और पुलिसिंग की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

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