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October 16, 2026

स्वामित्व योजना से रायगढ़ जिले के 19,917 ग्रामीणों को मिला संपत्ति का अधिकार अभिलेख*

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*स्वामित्व योजना से रायगढ़ जिले के 19,917 ग्रामीणों को मिला संपत्ति का अधिकार अभिलेख*

*ड्रोन सर्वे से ग्रामीण संपत्तियों का हो रहा है सटीक अभिलेखीकरण, 884 ग्रामों में कराया गया सर्वे*


*अधिकार अभिलेख मिलने से संपत्ति पर मालिकाना हक हुआ मजबूत, ग्रामीणों में दिख रहा अभूतपूर्व उत्साह*

रायगढ़, 26 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का विधिवत अधिकार दिलाने के उद्देश्य से रायगढ़ जिले में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के माध्यम से वर्षों से आबादी भूमि पर अपने मकान और परिसंपत्तियां बनाकर रह रहे ग्रामीणों को अब उनकी संपत्ति का विधिवत प्रमाणिक अभिलेख मिल रहा है। जिले में अब तक 19 हजार 917 हितग्राहियों को उनके मकानों एवं परिसंपत्तियों का स्वामित्व प्रमाण-पत्र अर्थात अधिकार अभिलेख वितरित किया जा चुका है। अधिकार अभिलेख हाथ में आने के साथ ग्रामीणों में अपनी संपत्ति को लेकर सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हुई है तथा योजना को लेकर गांवों में अभूतपूर्व उत्साह भी देखा जा रहा है।
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार जिले के 884 ग्रामों की आबादी भूमि का ड्रोन के माध्यम से सर्वे कराया गया है। इनमें से भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा 774 ग्रामों के नक्शे एवं अधिकार अभिलेख जिला प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं। इसके पश्चात 384 ग्रामों में ग्रामीणों को अधिकार अभिलेख वितरित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया ग्रामीणों की संपत्तियों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और सटीक अभिलेखीकरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
जिले में अब तक तहसीलवार कापू में 2,218, खरसिया में 701, घरघोड़ा में 6,468, छाल में 1,282, तमनार में 1,570, धरमजयगढ़ में 1,004, पुसौर में 2,702, मुकडेगा में 1,117, रायगढ़ में 1,159 तथा लैलूंगा में 1,696 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के लिए एक व्यवस्थित संपत्ति अभिलेख तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


*क्या है स्वामित्व योजना*


स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि में स्थित मकानों एवं अन्य परिसंपत्तियों का जीआईएस आधारित सर्वेक्षण तथा ड्रोन से भू-मापन किया जाता है। सर्वेक्षण के आधार पर प्रत्येक संपत्ति की स्थिति, सीमा और क्षेत्रफल का निर्धारण कर स्वामित्व प्रमाण-पत्र यानी अधिकार अभिलेख तैयार किया जाता है। ग्रामीण आबादी के सर्वेक्षण का कार्य राजस्व विभाग एवं भारतीय सर्वेक्षण विभाग, देहरादून द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
इस व्यवस्था से गांवों में स्थित निजी और सार्वजनिक संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार होगा। संपत्ति की सीमा और क्षेत्रफल स्पष्ट होने से भविष्य में निजी संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। वहीं रास्ते, ग्राम पंचायत की खुली भूमि, नाले, तालाब और सरोवर जैसी सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों की सीमाएं भी स्पष्ट होंगी, जिससे इनके संरक्षण और रखरखाव में ग्राम पंचायतों को सुविधा मिलेगी।

*ग्रामीणों के लिए अधिकार अभिलेख बना उपयोगी दस्तावेज*

अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का प्रमाणिक और व्यवस्थित रिकॉर्ड प्राप्त हो रहा है। संपत्ति का स्वामित्व प्रमाण-पत्र उपलब्ध होने से आवश्यकता पड़ने पर मकान अथवा संपत्ति के आधार पर बैंक से ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी। ड्रोन तकनीक से किए जा रहे सर्वेक्षण के कारण संपत्तियों का मापन और अभिलेख निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में अधिक सटीकता के साथ किया जा रहा है।
इसके साथ ही संपत्ति रजिस्टर तैयार होने से ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में संपत्ति धारकों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी। इससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करने, सार्वजनिक सुविधाओं की बेहतर योजना बनाने और ग्राम विकास की प्राथमिकताएं तय करने में भी मदद मिलेगी।
स्वामित्व योजना ग्रामीणों के लिए केवल संपत्ति का दस्तावेज प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के वास्तविक निवास और संपत्ति पर अधिकार को एक प्रमाणिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यही वजह है कि जब अधिकार अभिलेख ग्रामीणों के हाथों में पहुंच रहा है, तो उनके चेहरे पर अपनी संपत्ति के सुरक्षित और विधिवत दर्ज होने का संतोष दिखाई दे रहा है।

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