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February 18, 2026

14 दिन से लापता पूर्व विधायक चक्रधर सिंह के भाई जयपाल सिंह – लैलूंगा में प्रशासनिक नाकामी पर कांग्रेस का हल्ला बोल, पुलिस को दिया अंतिम अल्टीमेटम, आंदोलन की दी चेतावनी

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14 दिन से लापता पूर्व विधायक चक्रधर सिंह के भाई जयपाल सिंह – लैलूंगा में प्रशासनिक नाकामी पर कांग्रेस का हल्ला बोल, पुलिस को दिया अंतिम अल्टीमेटम, आंदोलन की दी चेतावनी

लैलूंगा, 19 जुलाई 2025
लैलूंगा एक बार फिर जनसंवेदनशील मुद्दे को लेकर सड़कों पर है। इस बार मामला सिर्फ राजनीतिक या प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधा आमजन की सुरक्षा, मानवता और एक परिवार की बिखरती उम्मीदों से जुड़ा है। 7 जुलाई 2025 को पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार के छोटे भाई जयपाल सिंह की रहस्यमयी गुमशुदगी ने न सिर्फ सिदार परिवार को, बल्कि पूरे लैलूंगा को स्तब्ध कर दिया है। दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद जयपाल सिंह का कोई सुराग नहीं लगना, पुलिस और प्रशासन की घोर विफलता को उजागर करता है।

🔍 कहाँ गायब हो गए जयपाल सिंह? प्रशासन के पास नहीं कोई जवाब

जयपाल सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना लैलूंगा में गुमशुदा क्रमांक 46/2025 के तहत दर्ज की गई थी। परंतु 14 दिन बाद भी उनका कोई पता नहीं चला। न तो कोई संदिग्ध हिरासत में लिया गया, न कोई मोबाइल ट्रेसिंग रिपोर्ट सामने आई और न ही प्रशासन की ओर से खोजबीन की कोई पारदर्शी कार्यवाही दिखाई दी। परिजनों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया होता तो अब तक कोई न कोई सुराग जरूर मिलता।

परिवार के सदस्यों के अनुसार जयपाल सिंह किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं रखते थे। उनका जीवन शांत और सरल था, परन्तु जिस तरह से वह अचानक लापता हुए, वह कई सवाल खड़े करता है। क्या यह सिर्फ एक साधारण गुमशुदगी है या इसके पीछे कोई साजिश रची गई है? यही प्रश्न लैलूंगा की जनता को झकझोर रहे हैं।


🚨 प्रशासन पर फूटा कांग्रेस का गुस्सा – थाना और राजस्व अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी लैलूंगा के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने थाना प्रभारी और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन की निष्क्रियता पर तीखी आपत्ति जताई। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो लैलूंगा में बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा।

ज्ञापन में कांग्रेस ने साफ किया कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की गुमशुदगी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता मामला है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनता का मानना है कि प्रशासन की शिथिलता और संवेदनहीनता के कारण ही आज जयपाल सिंह लापता हैं और उनका परिवार रोज़ रो-रोकर न्याय की भीख मांग रहा है।


🧾 ज्ञापन सौंपते समय मौजूद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता – एकजुटता का प्रदर्शन

ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व विधायक हृदयराम राठिया, जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ ग्रामीण के उपाध्यक्ष ओम सागर पटेल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ठंडा राम बेहरा, पूर्व यूथ कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष वीरेन्द्र शाह, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शौकीलाल प्रधान, दीनबंधु पटेल, मीडिया प्रतिनिधि व लैलूंगा विधायक सतीश शुक्ला, युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष आलोक गोयल, आदित्य बाजपेई, हृदय राम दाऊ, अपरांश सिन्हा, आकृत सारथी, आशीष सिदार, वसीम अहमद, दिलीप केरकेट्टा, अदल साय, ललित सिदार, संपत प्रधान, रोशन पंडा, महेंद्र सिदार, NSUI ब्लॉक अध्यक्ष तेजश बंजारे, विक्की वैष्णव सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

यह प्रतिनिधिमंडल न सिर्फ ज्ञापन सौंपने गया था, बल्कि यह संदेश देने भी कि “अब चुप नहीं बैठेंगे”। जयपाल सिंह को लेकर यदि प्रशासन की आंखें नहीं खुलीं तो कांग्रेस जनांदोलन के रूप में उन्हें जगाने मजबूर होगी।


⚠️ “एक सप्ताह में कार्यवाही नहीं, तो जन आंदोलन तय” – कांग्रेस की सीधी चेतावनी

ज्ञापन में दिए गए बिंदुओं में यह साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि यदि प्रशासन ने इस गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो ब्लॉक कांग्रेस कमेटी लैलूंगा बड़े आंदोलन की शुरुआत करेगी। इस आंदोलन में कांग्रेस कार्यकर्ता, जयपाल सिंह के परिजन और लैलूंगा की आम जनता संयुक्त रूप से हिस्सा लेंगे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “हम यह मांग करते हैं कि जयपाल सिंह की तलाश के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए, जिसमें पारदर्शिता हो और दैनिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि प्रशासन अपनी आंखें बंद करके बैठा रहा तो लैलूंगा की सड़कों पर जनसैलाब उतरेगा और इसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व प्रशासन पर होगा।”


📢 क्या पुलिस कर रही है लीपापोती? जनता में बढ़ रहा अविश्वास

स्थानीय निवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह धारणा बन रही है कि पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेने की बजाय औपचारिकता निभा रहा है। अब तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोई खुलासा नहीं, न ही परिवार को दी गई कोई नियमित सूचना। इससे स्पष्ट है कि पुलिस इस संवेदनशील मुद्दे पर लापरवाही बरत रही है।

जयपाल सिंह जैसे वरिष्ठ नेता के भाई के मामले में यदि इतनी उदासीनता है, तो आम जनता के साथ न्याय की क्या उम्मीद की जा सकती है – यह सवाल अब हर नागरिक की जुबान पर है।


🧑‍⚖️ प्रशासन को जगाने की आखिरी कोशिश – नहीं तो सड़क ही न्याय का मंच बनेगी

लैलूंगा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब शब्दों से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा, तो संघर्ष की अग्नि सुलगाई जाएगी। आने वाले सप्ताह में कांग्रेस द्वारा चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है जिसमें धरना, रैली, जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च, और जनसुनवाई जैसे कदम शामिल होंगे।


📌 क्या बोले परिजन? – “हमें सिर्फ हमारा जयपाल चाहिए”

जयपाल सिंह के परिजन अब पूरी तरह टूट चुके हैं। एक ओर उन्हें अपने लापता परिजन की चिंता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की बेरुखी ने उनके घावों को और गहरा कर दिया है। परिवार का कहना है कि “हम कोई राजनीति नहीं करते, हमें सिर्फ हमारा जयपाल चाहिए। पर प्रशासन ने हमारी पीड़ा को नज़रअंदाज़ किया है।”

🧭 क्या होगा आगे? – लैलूंगा की निगाहें प्रशासन पर टिकी

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अब लैलूंगा की जनता, कांग्रेस कार्यकर्ता और जयपाल सिंह का परिवार एकजुट होकर संघर्ष की राह पर चलने को तैयार हैं। प्रशासन के पास अब सिर्फ 7 दिन हैं – या तो ठोस कार्यवाही करे या फिर जन आंदोलन का सामना करने को तैयार रहे।

लैलूंगा में यह मामला अब सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं, बल्कि जनता के सुरक्षा अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही, और संवेदनशीलता की अग्निपरीक्षा बन चुका है।

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