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October 16, 2026

*मजदूरों की मेहनत पर PHE विभाग का डाका!*

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*मजदूरों की मेहनत पर PHE विभाग का डाका!*

* मजदूरी करने के बाद भी नहीं मिली मजदूरी, ठेकेदार भागा – इंजीनियर फोन तक नहीं उठा रहा

लैलूंगा क्षेत्र के मेहनतकश मजदूरों के साथ हुए खुले अन्याय ने पूरे इलाके में बवाल खड़ा कर दिया है। जमबाहार डेम से लैलूंगा तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य जोरों पर चल रहा है। इसी काम में फ़िल्टर मशीन बैठाने का जिम्मा ठेकेदार को दिया गया था। ठेकेदार ने स्थानीय मजदूरों से लगातार 9 दिनों तक खटवा लिया, पसीना बहवा लिया, लेकिन जब मेहनत का हिसाब चुकाने का समय आया तो ठेकेदार मौके से रफ्फूचक्कर हो गया

लैलूंगा हाई स्कूल महोला के ग्रामीण मजदूर बताते हैं कि वे सुबह से लेकर देर शाम तक इस काम में जुटे रहे। उम्मीद थी कि मेहनत का पैसा समय पर मिलेगा, लेकिन हक़ देने के बजाय ठेकेदार और PHE विभाग ने आंखें फेर लीं। मजदूरों का आरोप है कि “इंजीनियर को सौ से ज्यादा बार फोन लगाया गया, लेकिन वह न तो फोन उठाता है और न ही मिलना चाहता है।”

गांव के श्रमिकों में आक्रोश इतना है कि अब वे इसे सीधा ‘मजदूरों के हक़ पर डाका’ बता रहे हैं। एक तरफ सरकार बड़ी-बड़ी योजनाओं का ढोल पीट रही है कि हर घर नल से जल पहुंचेगा, वहीं दूसरी तरफ इन योजनाओं को पूरा कराने वाले मजदूरों को ही उनके खून-पसीने की कमाई से वंचित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ, तो वे काम बंद कर धरना-प्रदर्शन करेंगे और विभाग का घेराव करेंगे। ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि “इंजीनियर और ठेकेदार को क्षेत्र में तब तक घुसने नहीं दिया जाएगा जब तक मजदूरों का पाई-पाई हिसाब नहीं चुकाया जाता।

मजदूरी करने वाले मजदूरों में महेश राम भगत, चिंटू खान, शिवानंद सारथी, सुंदर यादव, राजेश कुमार, सोनू भगत, मेहतर राम भगत, अनंत राम भगत, श्रवण कुमार और लालजीत विश्वकर्मा शामिल हैं।

यह पूरा प्रकरण सिर्फ लैलूंगा ही नहीं, बल्कि पूरे जिले की उस मानसिकता को उजागर करता है जहां ठेकेदार और विभाग मिलकर गरीब मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जब विभागीय इंजीनियर फोन तक उठाने की जहमत नहीं कर रहा, तो आखिर मजदूर अपनी बात किससे कहें? अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले को अनसुना करता है और कब मजदूरों को उनका हक़ दिलाया जाएगा। लेकिन एक बात साफ है – लैलूंगा में मजदूर अब चुप बैठने वाले नहीं हैं।

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