शिवशंकर पैंकरा ब्लॉक युवा अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज लैलूंगा जी ने अपनी भाषण में कहा*





*शिवशंकर पैंकरा ब्लॉक युवा अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज लैलूंगा जी ने अपनी भाषण में कहा*
आज हम सब यहाँ एकत्रित हुए हैं उस वीर सपूत को नमन करने के लिए जिसने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत मां की स्वतंत्रता की ज्योति को प्रज्वलित किया — वह महान योद्धा थे वीर सीताराम कंवर जी।
सीताराम कंवर जी ने 1858 में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध वह विद्रोह किया जो नर्मदा घाटी और सतपुड़ा के जंगलों में गूंज उठा। उन्होंने केवल तलवार से नहीं, बल्कि अपने साहस, अपने संकल्प और अपने देशभक्ति के भाव से अंग्रेज सरकार को चुनौती दी। उस समय जब लोग भयभीत थे, सीताराम कंवर ने होल्कर रियासत और बड़वानी क्षेत्र के वीर भीलों तथा भिलालों को संगठित कर आज़ादी की आवाज बुलंद की।
सीताराम जी का उद्देश्य केवल सत्ता से टकराना नहीं था, बल्कि देश की माटी को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था। उन्होंने छोटे-से छोटे गांव के वीरों को भी संगठित किया और अंग्रेज शासकों की नीतियों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजाया। यद्यपि अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए इनाम की घोषणा कर दी थी, फिर भी वे अपने मार्ग से डिगे नहीं। अंततः 9 अक्टूबर 1858 को बीजागढ़ के पास एक भीषण संघर्ष में वे वीरगति को प्राप्त हुए।
उनकी शहादत बेकार नहीं गई। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना। उनके इसी साहस ने स्वतंत्रता संग्राम की उस चिंगारी को प्रज्वलित किया जिसने आगे चलकर आज़ादी की आग बनकर समूचे भारत में फैल गई।
वीर सीताराम कंवर अमर रहें!
भारत माता की जय!
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