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October 16, 2026

लैलूंगा में फूटा गुस्सा: “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक” के खिलाफ 7595 लोगों का महाप्रदर्शन, राज्यपाल को ज्ञापन

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लैलूंगा में फूटा गुस्सा: “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक” के खिलाफ 7595 लोगों का महाप्रदर्शन, राज्यपाल को ज्ञापन


लैलूंगा / छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के विरोध में लैलूंगा की सड़कों पर हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ईसाई समुदाय के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल विरोध रैली में करीब 7595 लोग शामिल हुए, जिन्होंने एक सुर में इस विधेयक को असंवैधानिक और दमनकारी बताते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया।


बुधवारी बाजार से उठी चिंगारी, SDM कार्यालय तक गरजा जनसैलाब

सुबह 11 बजे बुधवारी बाजार, लैलूंगा में आमसभा के साथ आंदोलन की शुरुआत हुई। सभा में डॉ. सी.डी. बखला, अभिनन्द खलखो, दिलीप केरकेट्टा, विमल कुजूर समेत कई प्रमुख वक्ताओं ने मंच से सरकार पर तीखे प्रहार किए।

इसके बाद रैली शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए थाना, अटल चौक होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां राज्यपाल के नाम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भरत कौसिक को ज्ञापन सौंपा गया।


“यह कानून नहीं, अधिकारों पर हमला है” – मंच से गरजे नेता

सभा में वक्ताओं ने विधेयक को लेकर गंभीर आरोप लगाए:

यह संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है

धर्म परिवर्तन पर 10 साल से आजीवन कारावास जैसी कठोर सजा का प्रावधान

आरोपी पर ही खुद को निर्दोष साबित करने का बोझ – न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ


साथ ही सवाल उठाया गया कि:
अन्य राज्यों के कानूनों में पुजारी/पंडित का जिक्र है, तो यहां क्यों नहीं?
क्या हिंदू धर्म में धर्मांतरण नहीं होता?


मुख्यमंत्री पर सीधा वार – “पहली FIR उन्हीं पर होगी!”

सभा में सबसे सनसनीखेज बयान तब सामने आया जब वक्ताओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:

अगर यह विधेयक कानून बना, तो पहली FIR मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज होगी!”

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्वयं धार्मिक प्रचार में शामिल हैं, जो विधेयक के तहत “प्रलोभन” की श्रेणी में आ सकता है।


ज्ञापन में उठे संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कई गंभीर बिंदु शामिल किए गए:

संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा पर खतरा

“प्रलोभन” शब्द की अस्पष्टता और दुरुपयोग की आशंका

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के उल्लंघन का आरोप

मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बताया गया



राज्यपाल से दो टूक मांग

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट मांग रखी:

1. इस विधेयक पर हस्ताक्षर न किए जाएं


2. इसे राष्ट्रपति के विचार हेतु भेजा जाए



भारी पुलिस बल, फिर भी नहीं थमा जोश

रैली के दौरान प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ।

नेतृत्व और भारी भीड़ की मौजूदगी

इस आंदोलन की अगुवाई ईसाई समुदाय के जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई, जिसमें
दिलीप केरकेट्टा (प्रदेश अध्यक्ष), विमल कुजूर, विलियम पन्ना, सुनील तिग्गा, ललित टोप्पो, मनीराम कुजूर, डॉ. अब्राहम टोप्पो, सुचिता बड़ा, कुसुम खलखो, अन्नु टोप्पो, विनीता लकड़ा, सुनीता बड़ा, शंकर खेस, इंदर साय टोप्पो, नानसाय तिर्की, महाजन लकड़ा, उज्वल एक्का, मानसीत लकड़ा, एशुदान मिंज, सुरेश टेटे, निर्मल कुजूर, पूर्व BEO नेवाश लकड़ा सहित हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

संकेत साफ है… आने वाला है सियासी तूफान!

लैलूंगा से उठी यह चिंगारी अब पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।
अगर सरकार ने इस विरोध को नजरअंदाज किया, तो आने वाले दिनों में सियासी बवाल तय माना जा रहा है।

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