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October 16, 2026

बीमार नाबालिग से दरिंदगी करने वाले दरिंदे को उम्रभर की कैद, तत्कालीन टीआई आशीर्वाद रहटगांवकर की सशक्त विवेचना से मिला इंसाफ

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बीमार नाबालिग से दरिंदगी करने वाले दरिंदे को उम्रभर की कैद, तत्कालीन टीआई आशीर्वाद रहटगांवकर की सशक्त विवेचना से मिला इंसाफ

इलाज के बहाने झाड़ियों में ले जाकर किया था दुष्कर्म, कोर्ट ने सुनाई शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास, पीड़िता को 6 लाख रुपये मुआवजे का भी आदेश

रायगढ़। थाना तमनार क्षेत्र में डेढ़ वर्ष पूर्व हुई नाबालिग से दुष्कर्म की जघन्य घटना में विद्वान विशेष न्यायधीश पॉसको शहाबुद्दीन कुरैशी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी त्रिभुवन अगरिया को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय, घरघोड़ा ने पीड़िता को 6 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने का भी आदेश दिया है।

प्रकरण के अनुसार, आरोपी ने बीमार नाबालिग बालिका को इलाज कराने का झांसा देकर बहला-फुसलाया और उसे झाड़ियों में ले जाकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद थाना तमनार में अपराध दर्ज कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू की गई।

इस संवेदनशील मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी तमनार एवं विवेचक निरीक्षक आशीर्वाद रहटगांवकर ने की। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित किए, पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों को मजबूत ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसी सशक्त विवेचना के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध कराने में सफल रहा और न्यायालय ने उसे कठोरतम सजा सुनाई।

न्यायालय ने अपने फैसले में आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास और ₹5,000 अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही पीड़िता को मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक क्षति को देखते हुए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 6 लाख की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश भी दिए।

उल्लेखनीय है तमनार थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद रहटगांवकर अपनी उत्कृष्ट विवेचना क्षमता के लिए पूर्व में केंद्रीय गृह मंत्री पदक से सम्मानित हो चुके हैं। इस प्रकरण में भी उनकी निष्पक्ष, तथ्यपरक और सशक्त जांच ने पीड़िता को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह फैसला न केवल मासूम पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए भी कड़ा संदेश है कि ऐसे अपराधों में कानून से बच निकलना संभव नहीं है।

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