स्वतंत्रता दिवस पर वीरेंद्र साह का संदेश: “आजादी सिर्फ बंधनों से मुक्ति नहीं, बेहतर भविष्य गढ़ने का साहस भी”





स्वतंत्रता दिवस पर वीरेंद्र साह का संदेश: “आजादी सिर्फ बंधनों से मुक्ति नहीं, बेहतर भविष्य गढ़ने का साहस भी”
लैलूंगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वीरेंद्र साह, लैलूंगा ने क्षेत्रवासियों एवं देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और सामाजिक जागृति का आह्वान किया है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि जब कोई व्यवस्था जड़ हो जाती है, तो समाज में घुटन, बेचैनी और बदलाव की छटपटाहट जन्म लेती है। ऐसे समय में जरूरी है कि समाज अपने सामर्थ्य पर विश्वास करे और परिवर्तन के विकल्प को पहचानने का साहस दिखाए।
वीरेंद्र साह ने कहा कि भारत के Gen-Z युवाओं ने नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने व्यवस्था से सवाल पूछने के साथ-साथ बदलाव की संभावना पर विश्वास करना भी सिखाया है। यह युवा शक्ति देश के बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें केवल देश की आजादी का उत्सव नहीं मनाना चाहिए, बल्कि अपने भीतर और आसपास मौजूद हर उस जड़ता के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लेना चाहिए, जो समाज की प्रगति में बाधा बन रही है।
उन्होंने सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था के साथ-साथ व्यक्तिगत सोच में भी सकारात्मक बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा कि जहां जड़ता है, वहां जागृति लाएं; जहां घुटन है, वहां परिवर्तन की राह बनाएं और जहां निराशा है, वहां उम्मीद का दीप जलाएं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल बंधनों से मुक्ति का नाम नहीं, बल्कि बेहतर समाज और बेहतर भविष्य के निर्माण का साहस भी है। उन्होंने सभी से सवाल पूछने, बदलाव पर विश्वास करने और परिवर्तन के सहभागी बनने का आह्वान किया।
वीरेंद्र साह ने अंत में सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा— “जय हिंद! जय भारत!”
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