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October 16, 2026

गोद में उठी बुजुर्ग महिला, सामने हुई जमीन की रजिस्ट्री,धरमजयगढ़ में पंजीयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल?

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गोद में उठी बुजुर्ग महिला, सामने हुई जमीन की रजिस्ट्री,धरमजयगढ़ में पंजीयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल?

धरमजयगढ़/रायगढ़। धरमजयगढ़ विकासखंड में राजस्व एवं पंजीयन से जुड़े मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब धरमजयगढ़ उप पंजीयक कार्यालय में एक बुजुर्ग, अशक्त एवं वाक्तविहीन महिला की जमीन की कथित रजिस्ट्री का मामला सामने आया है, जिसने पूरे पंजीयन तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। बता दें, जानकारी अनुसार मामला ग्राम बकालो, तहसील कापू निवासी रामकुंवर यादव से संबंधित बताया जा रहा है। शिकायत के अनुसार महिला चलने-फिरने में असमर्थ है और बोलने में भी कठिनाई है। उसके भू-स्वामित्व की खसरों क्रमांक 167, 172, 174, 285/2, 285/3, 295/3, 297/17 एवं 297/19, कुल रकबा 1.141 हेक्टेयर, की कथित रूप से उसकी स्वतंत्र सहमति के बिना रजिस्ट्री करा दी गई। आगे शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 24 अगस्त 2026 को सावित्री, परमेश्वर पिता किरीतराम निवासी पेलमा तथा आनंद जांगड़े निवासी कापू महिला को कार से धरमजयगढ़ लाए। इसके बाद उक्त भूमि की रजिस्ट्री ब्रजेश्वरी गुप्ता पति जयनंद गुप्ता, निवासी नवापारा-बनोरा, रायगढ़ के नाम किए जाने की बात सामने आई है।

रजिस्ट्री में चेक का उल्लेख, फिर नकद भुगतान की बात क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल भुगतान को लेकर उठ रहा है। शिकायत के अनुसार रजिस्ट्री दस्तावेज में आईसीआईसीआई बैंक, धरमजयगढ़ का चेक क्रमांक 000875 दर्ज किया गया है। वहीं महिला द्वारा दिए गए कथित बयान के अनुसार उसे जमीन के बदले दो लाख रुपये नकद दिए गए। यहीं से मामले की कहानी कई सवालों में उलझ जाती है,यदि भुगतान वास्तव में चेक के माध्यम से किया गया था, तो महिला के बैंक खाते में उस चेक की राशि जमा होने का प्रमाण क्या है? यदि भुगतान नकद हुआ, तो रजिस्ट्री दस्तावेज में चेक का उल्लेख क्यों किया गया? और यदि चेक वास्तव में जारी किया गया था, तो उसकी प्रति तथा बैंकिंग रिकॉर्ड कहां हैं? और रजिस्ट्री दस्तावेजों से चेक की फोटोकॉपी उपलब्ध नहीं होने की बात भी शिकायत में कही गई है। इन तमाम बिंदुओं की पुष्टि बैंक रिकॉर्ड, मूल पंजीयन दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान से ही हो सकती है। यहां यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि नकद लेन-देन के संबंध में “₹20 हजार से अधिक नकद देना ही स्वतः अवैध है” कहना सही कानूनी स्थिति नहीं है। आयकर कानून में अलग-अलग प्रकार के लेन-देन पर अलग प्रावधान लागू होते हैं और धारा 269ST के तहत एक व्यक्ति से एक दिन में अथवा एकल लेन-देन/एक घटना से संबंधित लेन-देन में ₹2 लाख से अधिक की नकद प्राप्ति पर प्रतिबंध का प्रावधान है। इसलिए इस मामले में वास्तविक भुगतान की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है।

गोद में उठाकर स्टूल पर बैठाने का आरोप..

मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि शिकायत आवेदन व महिला की शारीरिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि रजिस्ट्री के दौरान परमेश्वर यादव ने महिला को गोद में उठाकर उप पंजीयक कार्यालय में स्टूल पर बैठाया। आगे शिकायत के अनुसार इसी दौरान राहुल टंडन नामक व्यक्ति द्वारा महिला से जमीन बेचने के संबंध में सहमति देने के लिए कहा गया। बता दें,ये वही राहुल टंडन है जिसका शिकायतों का सिलसिला भी चर्चा में है ,मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, राहुल टंडन द्वारा शिकायत किए जाने का सिलसिला नया नहीं है। बताया जाता है कि जब पूर्व प्रभारी उप-पंजीयक उनमेश पटेल ने दस्तावेजों में आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण न होने के कारण रजिस्ट्री से इनकार किया था, तब भी शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी। वहीं, हाल ही में कापू थाना क्षेत्र में जातिसूचक शब्दों के कथित प्रयोग को लेकर भी शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जमीन बिक्री से जुड़े मौजूदा विवाद के साथ शिकायतों की इस कड़ी ने पूरे मामले को और भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। हालांकि, इन शिकायतों के पीछे के वास्तविक कारण और आरोपों की सत्यता संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। और वहीं मामले में आरोप यह भी है कि राहुल टंडन के साथी बताए जा रहे सौरभ सिंह द्वारा कथित रूप से दो लाख रुपये नकद महिला को दिए गए, जिन्हें महिला कुछ क्षण अपने पास रखने के बाद वहां मौजूद सावित्रीबाई द्वारा ले लिया गया। लेकिन बड़ा सवाल आखिर सौरभ सिंह नगद राशि देने वाले आखिर कौन है, किसने,किस अधिकार से,किस अधिकारी द्वारा अनुमति दी गई थी होगी? वहीं दूसरी सवाल उक्त दृश्य उपपंजीयक अधिकारी के सामने ही हो रही थी,फिर अधिकारी द्वारा मना क्यों नहीं किया गया होगा, क्या ये सब नियम कायदे कानून रजिस्ट्री के नियम शासनादेश होंगे? यदि शिकायत में वर्णित घटनाक्रम सही है तो सवाल केवल जमीन की बिक्री का नहीं, बल्कि महिला की वास्तविक सहमति, उसकी समझ एवं स्वतंत्र इच्छा, भुगतान की वास्तविकता और पंजीयन प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई सावधानियों का भी है।

उप पंजीयक की मौजूदगी में सबकुछ हुआ तो निगरानी किसकी थी?

वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरा घटनाक्रम तत्कालीन उप पंजीयक पूनम सिदार की मौजूदगी में हुआ। वे सभी दृश्य को सामने टीवी के बड़े पर्दे पर चल रहे,किसी सीरियल की तरह देखतीं रहीं। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी होगा कि पंजीयन के समय महिला की पहचान, शारीरिक स्थिति, उसकी स्वतंत्र सहमति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का किस प्रकार सत्यापन किया गया। और यदि दस्तावेजों में चेक के माध्यम से भुगतान दर्शाया गया है और दूसरी ओर नकद भुगतान का आरोप लगाया गया है, तो इस विरोधाभास को मूल रजिस्ट्री दस्तावेज, चेक रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

दलालों की भूमिका पर भी उठते रहे हैं, सवाल..?

धरमजयगढ़ क्षेत्र में जमीन संबंधी मामलों में कथित बिचौलियों एवं दलालों की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजस्व न्यायालयों और उप पंजीयक कार्यालयों में आम नागरिकों की अपेक्षा जमीन संबंधी काम कराने वाले बिचौलियों की आवाज अधिक प्रभावशाली नजर आती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा प्रकरण ने इस पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब जांच से ही खुलेगा सच…

मामले को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में सावित्री, परमेश्वर, आनंद जांगड़े और राहुल टंडन सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर हैं। क्या वास्तव में महिला ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से जमीन बेची थी? क्या रजिस्ट्री से पहले उसकी स्थिति और सहमति का पर्याप्त सत्यापन हुआ था? रजिस्ट्री में दर्ज चेक का भुगतान वास्तव में हुआ या नहीं? दो लाख रुपये नकद दिए जाने की बात में कितनी सच्चाई है? चेक की प्रति दस्तावेजों में क्यों नहीं है? और यदि पूरा घटनाक्रम पंजीयन अधिकारी के समक्ष हुआ, तो प्रक्रिया के दौरान इन बिंदुओं का सत्यापन किस आधार पर किया गया? इन सवालों का उत्तर आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि दस्तावेजी जांच, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पक्षों के बयान से ही सामने आ सकता है। फिलहाल यह मामला जांच के इंतजार में है और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ बुजुर्ग महिला के अधिकारों एवं भूमि संबंधी वैधानिक स्थिति पर भी सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेना होगा

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