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June 18, 2026

पेलमा जनसुनवाई पर रोक की मांग: कोल परियोजना से प्रभावित गांवों में मुआवजा व पुनर्वास को लेकर बढ़ा असंतोष

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पेलमा जनसुनवाई पर रोक की मांग: कोल परियोजना से प्रभावित गांवों में मुआवजा व पुनर्वास को लेकर बढ़ा असंतोष

रायगढ़। पेलमा कोल माइंस परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम जरीडीह सहित पेलमा, उरबा, हिझर, लालपुर मडवाडूमर, सक्ता और मिलुपारा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत कर 19 मई 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुआवजा, पुनर्वास नीति और रोजगार से जुड़ी उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक जनसुनवाई आयोजित करना न्यायसंगत नहीं होगा।

ग्रामीणों के अनुसार, एक ही परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण किए जाने के बावजूद अलग-अलग गांवों में सर्किल रेट में भारी अंतर है, जिससे प्रभावित परिवारों के बीच असमानता की स्थिति बन रही है। उनका तर्क है कि जब परियोजना एक है, तो मुआवजा भी समान दर पर दिया जाना चाहिए। विशेषकर दो फसली और उपजाऊ भूमि के लिए अलग-अलग दरों को लेकर नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश ग्रामीणों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में केवल नकद मुआवजा पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि भूमि के बदले वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका जीवनयापन प्रभावित न हो। साथ ही, प्रत्येक प्रभावित परिवार से कम से कम एक सदस्य को रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।


ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस संबंध में पूर्व में कई बार लिखित रूप से प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे उनमें असंतोष और अविश्वास की स्थिति गहराती जा रही है।

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया और जनसुनवाई को स्थगित नहीं किया गया, तो ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या ग्रामीणों की मांगों पर कोई ठोस पहल होती है।

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