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October 16, 2026

*किसानों के लिए खाद-बीज की भरपूर उपलब्धता, 24 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का सुरक्षित भंडारण*

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*किसानों के लिए खाद-बीज की भरपूर उपलब्धता, 24 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का सुरक्षित भंडारण*

*जिलेभर में सुचारु वितरण व्यवस्था, किसानों को मांग के अनुरूप मिल रही खाद*

*कालाबाजारी रोकने प्रशासन सतर्क, हर दिन हो रही निगरानी और निरीक्षण*

*वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा, आधुनिक कृषि के प्रति जागरूक हो रहे किसान*

*किसानों से भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील*

रायगढ़, 3 जून 2026/ जिले में खरीफ सीजन की तैयारियां पूरी गति से चल रही हैं और किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने, उर्वरकों की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण रखने तथा प्रत्येक कृषक तक समान रूप से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जिले में सतत निगरानी और सुव्यवस्थित वितरण व्यवस्था लागू की गई है। वर्तमान में जिले में 24 हजार मीट्रिक टन उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे किसानों की मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासनिक सक्रियता और योजनाबद्ध प्रबंधन के कारण जिले में खाद एवं बीज वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है, जिससे किसानों में संतोष और विश्वास का माहौल बना हुआ है।
             उप संचालक कृषि  ने बताया कि शासन द्वारा निर्धारित खाद वितरण सीमा का उद्देश्य किसी भी किसान को खाद से वंचित करना नहीं है, बल्कि जिले के अंतिम छोर तक बसे किसानों को भी समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था उर्वरकों के संतुलित वितरण और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लागू की गई है। कृषि विभाग के उर्वरक निरीक्षक, निगरानी दल और मैदानी अमले प्रतिदिन सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। किसानों को उनके खेती के रकबे के अनुसार नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। किसी भी विक्रय केंद्र में अनियमितता पाए जाने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। आगे भी जिले के सभी उर्वरक विक्रय केंद्रों की निगरानी लगातार जारी रहेगी ताकि किसानों को बिना किसी परेशानी के आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो सकें।
             कृषि विभाग द्वारा किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से हरी खाद उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार लेखन, जनसंपर्क गतिविधियों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।

*बीज भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था, किसानों से भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील*

जिले की सहकारी समितियों में खाद एवं बीज भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि विभाग ने बताया है कि गोदामों में खाद और बीज के सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है तथा किसी भी समिति में भंडारण क्षमता की कमी नहीं है। बीजों का सुरक्षित रख-रखाव और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने किसानों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे खाद एवं बीज की उपलब्धता को लेकर फैल रही किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। प्रशासन किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। जिले में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता तथा मजबूत निगरानी व्यवस्था के कारण किसानों को खरीफ सीजन के लिए आवश्यक कृषि आदान आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे बेहतर उत्पादन और कृषि समृद्धि की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

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