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August 16, 2026

*लैलूंगा में हरी खाद के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान*

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*लैलूंगा में हरी खाद के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान*

*करीब 150 किसानों ने खरीफ सीजन में बोया ढेंचा, 80 प्रतिशत तक रासायनिक उर्वरकों की बचत की संभावना*

*कृषि विभाग के मार्गदर्शन में हरी खाद के उपयोग को मिल रहा बढ़ावा, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की दिशा में पहल*

रायगढ़, 15 जुलाई 2026/ जिला प्रशासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा जिले में खेती को अधिक टिकाऊ एवं कम लागत वाला बनाने के उद्देश्य से किसानों को हरी खाद के उपयोग के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर किसानों को ढेंचा सहित अन्य हरी खाद वाली फसलों की जानकारी दे रहे हैं। किसानों को ढेंचा की बुवाई, खेत में उसके उपयोग, मिट्टी पर पड़ने वाले प्रभाव तथा रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करने में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से समझाया जा रहा है।
         इसी अभियान का सकारात्मक परिणाम लैलूंगा विकासखंड में देखने को मिल रहा है। इस खरीफ सीजन में विकासखंड के लगभग 150 किसानों ने अपने खेतों में ढेंचा की बुवाई की है। किसान इसे हरी खाद के रूप में उपयोग करेंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी सहायता मिलेगी।

*खेत में ही तैयार होगी प्राकृतिक हरी खाद*

ढेंचा एक दलहनी हरी खाद वाली फसल है। इसकी बुवाई के 40 से 45 दिनों बाद इसे खेत में पलट दिया जाता है। सड़ने-गलने के बाद यह प्राकृतिक खाद का रूप ले लेती है, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। इसके साथ ही भूमि की संरचना में सुधार होता है, जलधारण क्षमता बढ़ती है तथा फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

*रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होगी कम*

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरी खाद के रूप में ढेंचा का उपयोग करने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इससे किसानों को उर्वरकों पर होने वाले खर्च में कमी आने के साथ मिट्टी की उर्वराशक्ति को बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से प्रभावित भूमि के लिए भी हरी खाद एक उपयोगी विकल्प माना जाता है।

*कम लागत में बेहतर खेती की दिशा में प्रयास*

हरी खाद का उपयोग खेती की लागत कम करने के साथ-साथ भूमि की उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में भी सहायक है। इसी उद्देश्य से किसानों को खेत स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, ताकि वे खेती में हरी खाद का अधिक से अधिक उपयोग कर सकें। विभाग द्वारा किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, खेत भ्रमण और तकनीकी सलाह भी उपलब्ध कराई जा रही है।

*अन्य किसानों को भी किया जा रहा प्रेरित*

लैलूंगा विकासखंड में ढेंचा की खेती करने वाले किसानों के अनुभवों को अन्य किसानों तक भी पहुंचाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान हरी खाद का उपयोग अपनाएं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के लिए हरी खाद का अधिकाधिक उपयोग करें। इससे खेती को अधिक टिकाऊ, कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा।

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