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October 16, 2026

प्रेस विज्ञप्ति

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*नल-जल योजना को लेकर शिकायत के बाद जांच, विभागीय दस्तावेज़ और जांच के दौरान दी गई जानकारी में विरोधाभास का दावा*

लैलूंगा (रायगढ़)। ग्राम पंचायत झरन की नल-जल योजना को लेकर शिकायतकर्ता कन्हैया दास महंत ने जांच प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों और विभागीय दस्तावेज़ों के बीच विरोधाभास होने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कन्हैया दास महंत ने बताया कि उन्होंने जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित नल-जल योजना के संबंध में जिला पंचायत रायगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में उल्लेख किया गया था कि योजना का हैंडओवर ग्राम पंचायत द्वारा लिए जाने तथा योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचने की जानकारी मिली है। शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जनपद पंचायत लैलूंगा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जांच के निर्देश दिए।

निर्देश के बाद गठित जांच दल 15 जुलाई को ग्राम पंचायत झरन पहुंचा और योजना का निरीक्षण किया। कन्हैया दास महंत का कहना है कि निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं अन्य उपस्थित लोगों ने जांच दल के समक्ष कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा नल-जल योजना का हैंडओवर नहीं लिया गया है।

महंत का दावा है कि इसके बाद उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के अधिकारियों एवं इंजीनियरों से योजना से संबंधित अभिलेख प्राप्त किए। उनके अनुसार उपलब्ध दस्तावेज़ों में वर्ष 2025 में योजना का हैंडओवर एवं आधिपत्य ग्राम पंचायत को सौंपे जाने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेज़ों की प्रतियां एवं संबंधित रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि यदि विभागीय रिकॉर्ड में हैंडओवर का उल्लेख दर्ज है, तो जांच दल के समक्ष हैंडओवर नहीं लेने की जानकारी किस आधार पर दी गई। वहीं यदि जांच के दौरान दी गई जानकारी सही है, तो विभागीय अभिलेखों में दर्ज जानकारी की सत्यता की भी जांच आवश्यक है।

कन्हैया दास महंत ने यह भी कहा कि उपलब्ध अभिलेखों में ग्राम पंचायत के 241 परिवारों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने का उल्लेख है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि आज भी अधिकांश घरों में नियमित रूप से नल से पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो योजना के क्रियान्वयन और अभिलेखों की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

उन्होंने जिला प्रशासन, जिला पंचायत तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि पीएचई विभाग के मूल रिकॉर्ड, हैंडओवर दस्तावेज़, ग्राम पंचायत के अभिलेख एवं मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी स्तर पर तथ्य छिपाने, गलत जानकारी देने या अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

कन्हैया दास महंत ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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