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October 16, 2026

झूठे आवेदन से ईमानदार पत्रकार को बदनाम करने की साजिश: पूर्व अपराधियों और भ्रष्ट पटवारी की साज़िश बेनकाब

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झूठे आवेदन से ईमानदार पत्रकार को बदनाम करने की साजिश: पूर्व अपराधियों और भ्रष्ट पटवारी की साज़िश बेनकाब

लैलूंगा, रायगढ़:
क्षेत्र में अपनी निर्भीक पत्रकारिता और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल को बदनाम करने का षड्यंत्र सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जायसवाल के खिलाफ कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा लैलूंगा थाने में एक झूठा और बेबुनियाद आवेदन देकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया है। उक्त आवेदन में न केवल उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए गए, बल्कि आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल कर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया।

गौरतलब है कि यह साजिश ऐसे लोगों द्वारा रची गई है, जिनका खुद का आपराधिक और भ्रष्ट इतिहास रहा है। इनमें प्रमुख नाम राजेश कुमार शर्मा का है, जो “रेगड़ी वाला” के नाम से कुख्यात है। पूर्व में लूट और मारपीट जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्तता के कारण राजेश शर्मा जेल की हवा खा चुका है और वर्तमान में जमानत पर बाहर है। ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी बयान अपने आप में संदेहास्पद है।

इसके अलावा, पटवारी संजय भगत पर भी कई गंभीर आरोप पहले से लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भगत न केवल शराब लेकर आता है बल्कि कई मामलों में रिश्वत लेकर भी कार्य करने से इनकार करता है। इस तरह के भ्रष्ट अधिकारी जब अपने काले कारनामे को उजागर होते देख घबरा जाते हैं, तो पत्रकारों को निशाना बनाना उनका पुराना हथकंडा रहा है।

स्थानीय जनता और पत्रकार संघों ने इस साजिश की कड़ी निंदा की है। नागरिकों का कहना है कि चंद्रशेखर जायसवाल जैसे निर्भीक पत्रकार ही हैं जो क्षेत्र में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अपराधियों के गठजोड़ को उजागर करने का साहस रखते हैं। उनकी आवाज को दबाने के लिए इस तरह की ओछी हरकत की जा रही है।

जनता मांग कर रही है कि लैलूंगा थाना इस झूठे आवेदन की निष्पक्ष जांच करे और पत्रकार की छवि खराब करने वाले षड्यंत्रकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। अगर प्रशासन मौन रहा, तो आने वाले दिनों में आम जनता और पत्रकार समुदाय सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा।

यह मामला न सिर्फ एक पत्रकार की गरिमा का प्रश्न है, बल्कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला भी है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह सच्चाई के साथ खड़ा हो और अपराधियों को संरक्षण देना बंद करे।

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