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October 16, 2026

लैलूंगा में बच्चों की ज़िंदगी से खिलवाड़! जर्जर स्कूल भवन बना मौत का कुंआ, मासूम दूसरे की परछी में पढ़ने को मजबूर!

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लैलूंगा में बच्चों की ज़िंदगी से खिलवाड़! जर्जर स्कूल भवन बना मौत का कुंआ, मासूम दूसरे की परछी में पढ़ने को मजबूर!


लैलूंगा विकासखंड के ग्राम पंचायत खम्हार बस्ती पारा  की प्राथमिक शाला इन दिनों बदहाली की मार झेल रही है। महीनों से स्कूल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दीवारों में गहरी दरारें, छत से झड़ता पलस्तर और टपकता पानी बच्चों की ज़िंदगी के लिए खतरा बन चुका है। भयावह स्थिति यह है कि डर के साए में बच्चे अब अपने ही स्कूल भवन में नहीं, बल्कि दूसरे के परछी में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में तो हालात और भी बुरे हो जाते हैं। छत से पानी टपकने के कारण किताबें भीग जाती हैं, और बच्चों को जान जोखिम में डालकर क्लास में बैठना पड़ता है। कई बार शिक्षक और ग्रामीणों ने इस जर्जर भवन की मरम्मत की मांग की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।

शिक्षकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई बार बीईओ लैलूंगा को लिखित रूप में अवगत कराया, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण आज भी कोई ठोस कायवाही नहीं की गई है। हर दिन बच्चे खतरे के साए में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही नई स्कूल बिल्डिंग का निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। शिक्षा के मंदिर की ये दुर्दशा न केवल शासन-प्रशासन की लापरवाही का सबूत है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर कब तक मासूमों की पढ़ाई और जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा?

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अब ग्रामीणों की बस यही मांग है —
“बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का हक़ दीजिए, इससे पहले कि कोई हादसा हेडलाइन बन जाए!”

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