आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला, कार्यकर्ता-सहायिका नदारद! बच्चों का हक छीनकर निजी काम में व्यस्त कर्मचारी



आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला, कार्यकर्ता-सहायिका नदारद! बच्चों का हक छीनकर निजी काम में व्यस्त कर्मचारी
लैलूंगा। मुकडेगा सेक्टर के ग्राम सोनाजोरी के बथान पारा आंगनबाड़ी केंद्र की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र समय से पहले बंद कर दिया गया और कार्यकर्ता व सहायिका दोनों ही मौके से नदारद मिलीं। इससे छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार, बथान पारा आंगनबाड़ी केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता नीलमणि अपने निजी कार्य से लैलूंगा चली गईं, जबकि सहायिका भी केंद्र को समय से पहले बंद कर घर चली गई। केंद्र के बाहर ताला लटका मिला और बच्चे व हितग्राही इधर-उधर भटकते नजर आए। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार इस तरह की लापरवाही देखी गई है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन जब केंद्र ही बंद मिले और कर्मचारी नदारद हों, तो योजनाओं का लाभ लोगों तक कैसे पहुंचेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की लापरवाही से योजनाएं दम तोड़ रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार आंगनबाड़ी केंद्र समय से पहले बंद कर दिया जाता है और कर्मचारी अपने निजी काम में व्यस्त रहते हैं। इससे बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार, पढ़ाई और देखभाल सब प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
इस मामले में जब परियोजना अधिकारी मेरी फातिमा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अगर आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यदि केंद्र बंद मिला और कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं थे तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।”
फिलहाल इस घटना से ग्रामीणों में नाराजगी साफ नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित हो और बच्चों को उनका हक मिल सके।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जांच के बाद लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
Editor In Chief - k24news.co.in
Mo.7509127461



