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August 18, 2026

मूसलाधार बारिश भी नहीं रोक पाई आरसीएम का जुनून! रेसिंग कोर लीडर आत्माराम कासवान के सेमिनार में उमड़ा उत्साह

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मूसलाधार बारिश भी नहीं रोक पाई आरसीएम का जुनून! रेसिंग कोर लीडर आत्माराम कासवान के सेमिनार में उमड़ा उत्साह

जशपुर/पत्थलगांव, 18 अगस्त 2026। मूसलाधार बारिश के बीच भी आरसीएम से जुड़े लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। पत्थलगांव स्थित होटल अर्नव एजेंसी में रेसिंग कोर लीडर मिस्टर आत्माराम कासवान का शानदार आरसीएम सेमिनार आयोजित हुआ। सेमिनार में आरसीएम से जुड़ी कार्यप्रणाली, अनुभव और आगे बढ़ने के अवसरों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

सेमिनार में आत्माराम कासवान ने अपने जीवन के संघर्ष और आरसीएम से जुड़ने के बाद आए बदलावों को बेहद सरल एवं प्रभावी तरीके से साझा किया। उन्होंने बताया कि वे राजस्थान के श्रीगंगानगर के एक सामान्य परिवार से आते हैं। उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। परिवार के पालन-पोषण के लिए उन्होंने गांव-गांव जाकर दूध बेचने सहित कई छोटे-बड़े काम किए, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों में विशेष बदलाव नहीं आ सका।

इसी संघर्ष के दौर में उनके जीवन में आरसीएम का प्रवेश हुआ। शुरुआत में परिस्थितियां आसान नहीं थीं। आरसीएम के सेमिनार और प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के जेवर तक गिरवी रख दिए। लेकिन उन्होंने संघर्ष और मेहनत का रास्ता नहीं छोड़ा। लगातार सीखते रहे, लोगों से जुड़ते रहे और आरसीएम के माध्यम से अपने काम को आगे बढ़ाते रहे।

आत्माराम कासवान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए मेहनत, निरंतरता, सही मार्गदर्शन और लोगों के साथ जुड़कर काम करने की क्षमता जरूरी है। उन्होंने आरसीएम के माध्यम से लोगों को अपने कौशल को विकसित करने, उत्पादों की जानकारी प्राप्त करने तथा व्यवसायिक अवसरों को समझने के बारे में जानकारी दी।

आरसीएम क्या है?

आरसीएम एक डायरेक्ट सेलिंग/डायरेक्ट मार्केटिंग मॉडल के रूप में काम करता है, जिसमें कंपनी के उत्पादों को स्वतंत्र वितरकों/प्रतिनिधियों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। इसमें सामान्यतः उत्पादों की जानकारी, बिक्री, ग्राहक सेवा और नेटवर्क निर्माण जैसे पहलुओं पर काम किया जाता है।

सेमिनार में आरसीएम से जुड़े लोगों को यह समझाया गया कि किसी भी व्यवसाय में सफलता केवल सपने देखने से नहीं, बल्कि सही जानकारी हासिल करने, अनुशासन के साथ काम करने और लगातार सीखते रहने से मिलती है। साथ ही प्रतिभागियों को कंपनी की योजनाओं और कार्यप्रणाली को समझकर ही कोई निर्णय लेने की सलाह दी गई।

आत्माराम कासवान की संघर्ष से सफलता तक की यात्रा ने सेमिनार में मौजूद लोगों को काफी प्रभावित किया। कभी गांव-गांव जाकर दूध बेचकर परिवार चलाने वाले आत्माराम आज अपने अनुभव और कार्यशैली के जरिए दूसरे लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।

मूसलाधार बारिश के बावजूद सेमिनार में लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि सीखने और आगे बढ़ने का जुनून मौसम की बाधाओं से बड़ा होता है।

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