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February 18, 2026

तमनार क्षेत्र में खुड़खुड़िया जुए की महफ़िल सजाने के लिए ही कराया जा रहा मेला

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तमनार क्षेत्र में खुड़खुड़िया जुए की महफ़िल सजाने के लिए ही कराया जा रहा मेला


किसके संरक्षण से खेले जा रहे लाखों के दांव ?

रायगढ़। तमनार घरघोड़ा क्षेत्र के आस-पास के लगभग सभी ग्रामों में रथोत्सव आते ही खुड़खुड़िया जुए की महफ़िल सजनी शुरू हो जाती है जो की लगभग 3 महीने तक प्रायः प्रतिदिन चलती है। यहाँ रथ मेला कार्यक्रम तो लगभग खत्म हो गया है पर खुड़खुड़िया मेला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में अभी भी सिर्फ झंडी मुंडी वाला जुआ खेलाने के उद्देश्य से मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसमे खुड़खुड़िया की की बड़ी बड़ी महफिल लग रही है। ऐसा ही एक नजारा हमें बीते दिवस तमनार थाना क्षेत्र स्थित रावनगुड़ा गाँव में देखने को मिला जहाँ खुड़खुड़िया जुए की बड़ी सी महफ़िल क्षेत्र के नामी खुड़खुड़िया खेलाने वाले खाईवाल द्वारा लगाई गई थी। इस क्षेत्र में खुड़खुड़िया खेलाने वालों के नाम का जिक्र करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सभी लोग यहाँ तक की पुलिस भी उनको कहीं ना कहीं ऐसे कामों के लिए जानती है। खुड़खुड़िया एक ऐसा जुआ है जिसमें लाखों के दांव एक रात एक मेले में लगते हैं। ऐसे में अन्दाजा लगाया जा सकता है कि महीने भर क्षेत्र के आस पास हर दिन लगने वाले मेलों में कितने लाखों का वारा न्यारा किया जाता होगा । हर साल रथ मेले के बाद भी जबरन खुड़खुड़िया जुआ मेला का आयोजन अब इतनी आम बात हो चली है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे मेलो में बकायदा अलग से खुड़खुड़िया जुए का बाजार बैठा दिया जाता है जहां देर रात तक खुलेआम जुआ चलाकर पुलिस प्रशासन को चुनौती दिया जाता है ।

पुलिस प्रशासन का नहीं दिखता खुड़खुड़िया वालों में भय

खुड़खुड़िया खिलाने वालो में पुलिस प्रशासन का तनिक भी भय नजर नही आता ये बड़े अचरज की बात है कि खुलेआम पट्टी बिछा कर,टोकरी में गोटियाँ उलट पलट कर जुआ खिलाने वाले इतने बेखौफ कैसे हो सकते हैं ? जाहिर सी बात है कि पुलिस प्रशासन के साथ अंदरूनी सेटिंग के बाद ही उनकी नाक के नीचे ऐसे जुए की महफ़िल बिना डर भय के सजती है ।

खुड़खुड़िया जुआ का मनोवैज्ञानिक पक्ष

खुड़खुड़िया जुए में लाखों हारने के बाद भी लोग क्यों इस जुए को खेलने बेकरार दिखते हैं इस पर जब हमने विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने बताया कि खुड़खुड़िया का कांसेप्ट ही ऐसा है कि देखकर हर आदमी को लगता है कि वो इसमे जीत सकता है । इस जुए को बनाया ही ऐसा गया है कि खिलाड़ी कभी न जीत पाए । इक्का दुक्का खिलाड़ी ही इसमे जीतेंगे क्योंकि इस खेल को खेलना शुरू करते ही मानसिकता ऐसी बनती है कि इसमें बड़ी रकम जीती जा सकती है फिर रकम डबल ट्रिपल करने के चक्कर में लोग अपना मूलधन भी गंवा बैठते है।

बहरहाल अब यह देखना होगा की क्षेत्र में कब तक खुड़खुड़िया जुआ चलता ही रहता है।

शेखर जायसवाल लैलूंगा

हीरालाल राठिया लैलूंगा

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